- सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज, इंदौर-देवास से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग पार्किंग और रूट प्लान तैयार करने के निर्देश; संभागायुक्त बोले- घाट निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, समयसीमा में काम पूरा करें
- उज्जैन में पंचकोशी यात्रा शुरू: महापौर ने नागचन्द्रेश्वर से किया शुभारंभ, 25 हजार श्रद्धालु पहुंचे
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा, जयकारों से गूंजा परिसर
- महाकाल मंदिर पहुंचे सुनंदा शर्मा और मनीष मल्होत्रा: नंदी हॉल से किए दर्शन, लिया आशीर्वाद
- एक्ट्रेस सारा अर्जुन ने महाकाल में की भस्म आरती: सुबह 4 बजे पहुंचीं, 2 घंटे तक रहीं शामिल
41/84 श्री लुम्पेश्वर महादेव
41/84 श्री लुम्पेश्वर महादेव :
म्लेच्छ गणों का राजा था लुम्पाधिप। उसकी रानी थी विशाला। एक बार राजा ब्राम्हणों के कहने पर युद्ध करने के लिए सामग नामक ब्राम्हण के आश्रम गया। वहां राजा ने आश्रम में कामधेनू गाय की मांग की ब्राम्हण ने मना किया तो राजा ने कामधेनू गाय के साथ पूरे आश्रम का नाश कर दिया। राजा ने अपने बाणों से सागम मुनि का भी वध कर दिया ओर वहां से चला गया। कुछ देर बाद ही वहां सागम मुनि का पुत्र समिधा आश्रम पहुंचा और अपने पिता को मृत देखकर वह रूदन करने लगा ओर फिर उसने अपने पिता की हत्या करने वाले राजा को श्राप दिया कि वह कुष्ठ रोग से पीडित होगा। श्राप के प्रभाव से राजा कुष्ठ रोग से पीडित होकर मृत्यु को प्राप्त करने के लिए निकल गया। राजा के चिता पर होने पर वहां नारद मुनि प्रकट हुए और उसे समिधा के श्राप से अवगत कराया। नारद मुनि के कहने पर राजा महाकाल वन में केशवार्क महादेव के पास स्थित शिवलिंग का पूजन करने के लिए निकल गया। राजा ने अपनी रानी के साथ शिप्रा स्नान किया ओर शिवलिंग के दर्शन किए। दर्शन मात्र से राजा का कुष्ठ रोग दूर हो गया। राजा ने आपनी रानी के साथ वहां उपस्थित मुनियों का सम्मान किया। राजा लुम्पाधिप के पूजन के कारण शिवलिंग लुम्पेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुआ। मान्यता है कि जो भी मनुष्य पूर्ण भक्ती से पूजन करेगा उसके सात जन्मों के पाप नष्ट होगें ओर अंतकाल में परम पद को प्राप्त करेगा।